विद्यारंभ संस्कार-विवेचन

Author: Pt Shriram sharma acharya

Web ID: 696

`4 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

विद्यारम्भसंस्कार-विवेचन

शास्त्रकार विद्या विहीन की तुलना पशु से की है। ज्ञान ही मनुष्य की विशेषता है अन्यथा अनेक बातों में तो वह पशु से पिछड़ा हुआ है हाथी के बराबर बलवान सिंह की तरह पराक्रमी, घोड़े की तरह चलने वाला, बैल की तरह पराक्रमी, कुत्ते की तरह गंध ज्ञानी बन्दर की तरह वृक्षारोही, गौ की तरह सौम्य भला मौन मनुष्य हो सकता है ? इन दृष्टियों से मनुष्य की उपेक्षा पशु ही नहीं अधिक बढ़े-चढ़े होते है। उनकी तुलना में मनुष्य में जो विशेषता है वह उसकी ज्ञान शक्ति की है। अज्ञानी मनुष्य का जीवन पर निश्चय ही पशुओं से गया-गुजरा है। उसे किसी दिशा में प्रगति करने उल्लासपूर्ण जीवन जीने का अवसर तो मिलता ही नहीं। शरीर प्रेरण की, निर्वाह की आवश्यकता भी कठिनाई से पूरी कर पाता अनेक असुविधा, अभावों और आपत्तियों से भरी जिन्दगी जीनी पड़ती है। ज्ञान की जिसमें अपूर्णता हैं, उसको संसार में सर्वत्र अभाव में अभाव होते रहेंगे। मानवोचित प्रगति के सभी द्वार उसके लिए बन्द हो पड़े रहेंगे।

विद्या-विहीन न रहें-इसलिए मनीषियों ने हर व्यक्ति को विद्या पढ़ने की अनिवार्य आवश्यकता बताई है। विद्या ज्ञान की आधारशिला है। जिसे विद्या नहीं आती उसे ज्ञान लाभ से वंचित रहना पड़ेगा। ‘ज्ञानात् मूक्ति’ सूत्र के अनुसार कष्ट और क्लेशों से छुटकारा केवल ज्ञानवान को ही मिल सकता है। अज्ञानी तो निविड़ बन्धनों में बँधा ही रहता है और शरीर बन्धनों में पड़े हुए बन्दी को कष्ट भोगने पड़ते हैं। उन्हें सहता ही रहता है। अन्धकार में भटकना ही पड़ता है, सही मार्ग प्रकाश होने पर ही मिलेगा। अज्ञान को अन्धकार और ज्ञान को प्रकाश बताया गया है। हमें क्या करना, किधर चलना, कैसे रहना है, इन प्रश्नों का उत्तर ज्ञान के आधार पर ही उपलब्ध किया जा सकता है।

Table of content

1.विद्यारम्भ संस्कार विवेचन
a.शिक्षा से व्यक्तित्व विकास
b.एक ही उपाय विद्याध्ययन
c.अभिभावकों का कर्तव्य



Author Pt Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 24
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 08:01:AM
  • 28 Oct 2020




Write Your Review



Relative Products