यज्ञोपवीत ( उपनयन ) संस्कार पद्धति

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

भारत में महापुरुषों की जो महान परम्परा रही है उसके पीछे ऋषियों द्वारा विकसित संस्कार परम्परा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऋषियों ने संस्कारों को चेतना विज्ञानं के अनुसार ऐसा प्रभावशाली बनाया, जिसके आधार पर अभिभावक अपने संक्लप के अनुसार गुण, धर्म वाली संतान पैदा और विकसित कर लेते थे। इसी कारण हर समय और हर परिस्थिति में यहाँ प्रचुर संख्या में महामानवों का जन्म और विकास होता रहा है।

कालांतर में वह गरिमामयी परंपरा विकृत और लुप्तप्राय हो गयी। संस्कारों का दर्शन और विज्ञान भुला दिया गया और कर्मकांडों को रूढ़ियों की तरह धकया जाने लगा। उन्हें इतना जटिल और खर्चीला भी बना दिया गया कि सामान्य हैसियत का व्यक्ति उन्हें संपन्न ही न कर पाए।

Table of content

1. उपयोगिता और आवश्यकता
2. शास्त्रों का अभिवचन
3. संस्कार की विधि व्यवस्था
4. संस्कार प्रयोजन
5. यज्ञोपवीत से सम्बंधित स्थूल-सूक्ष्म मान्यताएं
6. यज्ञोपवीत के नियम
7. मेखला-कोपीन धारण
8. यज्ञोपवीत पूजन
9. यज्ञोपवीत धारण
10. दीक्षा प्रकरण
11. गुरु पूजनम
12. मंत्र दीक्षा
13. भिक्षाचरणम
Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2016
Publication Yug Nirman Yojana Press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 07:20:AM
  • 28 Oct 2020




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